ख़ाक उड़ाना भी नहीं चाहता है!

सैर भी जिस्म के सहरा की ख़ुश आती है मगर,

देर तक ख़ाक उड़ाना भी नहीं चाहता है|

इरफ़ान सिद्दीक़ी

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