क़िस्सा मुख़्तसर करने नहीं देते!

क़लम मैं तो उठा के जाने कब का रख चुका होता,

मगर तुम हो के क़िस्सा मुख़्तसर करने नहीं देते|

वसीम बरेलवी

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