तहज़ीब में क़बा ही नहीं!

हमारे अहद की तहज़ीब में क़बा ही नहीं,

अगर क़बा हो तो बंद-ए-क़बा की बात करें|

*गाउन जैसा ढीला वस्त्र

साहिर लुधियानवी

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