उन से बहार ओ बाग़ की बातें कर के जी को दुखाना क्या,
जिन को एक ज़माना गुज़रा कुंज-ए-क़फ़स में राम हुए|
इब्न-ए-इंशा
A sky full of cotton beads like clouds
उन से बहार ओ बाग़ की बातें कर के जी को दुखाना क्या,
जिन को एक ज़माना गुज़रा कुंज-ए-क़फ़स में राम हुए|
इब्न-ए-इंशा
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