चाह की राह दिखाकर!

शौक़ की आग नफ़स की गर्मी घटते घटते सर्द न हो,

चाह की राह दिखा कर तुम तो वक़्फ़-ए-दरीचा-ओ-बाम हुए|

इब्न-ए-इंशा

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