गुमनाम हुए!

लोग हिलाल-ए-शाम से बढ़ कर पल में माह-ए-तमाम* हुए,

हम हर बुर्ज में घटते घटते सुब्ह तलक गुमनाम हुए|

*Full Moon

इब्न-ए-इंशा

One response to “गुमनाम हुए!”

  1. मैं तुम्हारे महफिलों का चांद नही सितारा ठहरा
    डूबना फितरत नहीं मेरा फितरत रोशनी ठहरा

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