जिस पे होता ही नहीं ख़ून-ए-दो-आलम साबित,
बढ़ के इक दिन उसी गर्दन में हमाइल* हो जाओ|
*झूल जाओ
इरफ़ान सिद्दीक़ी
A sky full of cotton beads like clouds
जिस पे होता ही नहीं ख़ून-ए-दो-आलम साबित,
बढ़ के इक दिन उसी गर्दन में हमाइल* हो जाओ|
*झूल जाओ
इरफ़ान सिद्दीक़ी
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