मेरे हल्क़े में आते हैं!

मेरा मज़हब इश्क़ का मज़हब जिस में कोई तफ़रीक़ नहीं,

मेरे हल्क़े में आते हैं ‘तुलसी’ भी और ‘जामी’ भी|

क़ैसर शमीम

Leave a comment