मेरा मज़हब इश्क़ का मज़हब जिस में कोई तफ़रीक़ नहीं,
मेरे हल्क़े में आते हैं ‘तुलसी’ भी और ‘जामी’ भी|
क़ैसर शमीम
A sky full of cotton beads like clouds
मेरा मज़हब इश्क़ का मज़हब जिस में कोई तफ़रीक़ नहीं,
मेरे हल्क़े में आते हैं ‘तुलसी’ भी और ‘जामी’ भी|
क़ैसर शमीम
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