और हैं कितने हामी भी

महफ़िल महफ़िल ज़िक्र हमारा सोच समझ के कर वाइज़,

अपने मुख़ालिफ़ भी हैं कितने और हैं कितने हामी भी|

क़ैसर शमीम

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