जादू मिरे सुख़न में रहे!

मुझे नहीं किसी उसलूब-ए-शाइरी* की तलाश,

तिरी निगाह का जादू मिरे सुख़न में रहे|

*Style of Poetry

मजरूह सुल्तानपुरी 

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