आश्वस्त! 

आज एक बार फिर मैं श्रेष्ठ और अपनी तरह के अनूठे हिन्दी कवि स्वर्गीय भवानी प्रसाद मिश्र जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ|

भवानी दादा की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं|

लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय भवानी प्रसाद मिश्र जी की यह कविता –

हम
रात-भर तैरेंगे

और अगर
डूब नहीं गए
सवेरे तक

तो कोई न कोई
डोंगी छोटी
या बड़ी कोई नौका

फिर देगी हमें मौक़ा
धरती पर पहुँचकर
उथल-पुथल करने का !

(आभार- एक बात मैं और बताना चाहूँगा कि अपनी ब्लॉग पोस्ट्स में मैं जो कविताएं, ग़ज़लें, शेर आदि शेयर करता हूँ उनको मैं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध ‘कविता कोश’ अथवा ‘Rekhta’ से लेता हूँ|)

आज के लिए इतना ही,

नमस्कार| 

                              ********

2 responses to “आश्वस्त! ”

  1. नमस्कार 🙏🏻

    Liked by 2 people

    1. नमस्कार जी

      Like

Leave a comment