A sky full of cotton beads like clouds
अहल-ए-ज़बाँ तो हैं बहुत कोई नहीं है अहल-ए-दिल,
कौन तिरी तरह ‘हफ़ीज़’ दर्द के गीत गा सके|
हफ़ीज़ जालंधरी
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