दर्द के गीत गा सके!

अहल-ए-ज़बाँ तो हैं बहुत कोई नहीं है अहल-ए-दिल,

कौन तिरी तरह ‘हफ़ीज़’ दर्द के गीत गा सके| 

हफ़ीज़ जालंधरी

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