हाथ भी रक्खे कानों पर

उस का क्या मन-भेद बताऊँ उस का क्या अंदाज़ कहूँ,

बात भी मेरी सुनना चाहे हाथ भी रक्खे कानों पर|

जाँ निसार अख़्तर

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