मेरे जलते शानों पर!

शहर के तपते फ़ुटपाथों पर गाँव के मौसम साथ चलें,

बूढ़े बरगद हाथ सा रख दें मेरे जलते शानों पर|

जाँ निसार अख़्तर

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