बरखा की तो बात ही छोड़ो चंचल है पुर्वाई भी,
जाने किस का सब्ज़ दुपट्टा फेंक गई है धानों पर|
जाँ निसार अख़्तर
A sky full of cotton beads like clouds
बरखा की तो बात ही छोड़ो चंचल है पुर्वाई भी,
जाने किस का सब्ज़ दुपट्टा फेंक गई है धानों पर|
जाँ निसार अख़्तर
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