आए क्या क्या याद नज़र जब पड़ती इन दालानों पर,
उस का काग़ज़ चिपका देना घर के रौशन-दानों पर|
जाँ निसार अख़्तर
A sky full of cotton beads like clouds
आए क्या क्या याद नज़र जब पड़ती इन दालानों पर,
उस का काग़ज़ चिपका देना घर के रौशन-दानों पर|
जाँ निसार अख़्तर
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