मेरे बुझने का नज़्ज़ारा!

शाम हुए ख़ुश-बाश यहाँ के मेरे पास आ जाते हैं,

मेरे बुझने का नज़्ज़ारा करने आ जाते होंगे|

जौन एलिया

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