जनाब-ए-शैख़ को ये मश्क़ है याद-ए-इलाही की,
ख़बर होती नहीं दिल को ज़बाँ से याद करते हैं|
चकबस्त ब्रिज नारायण
A sky full of cotton beads like clouds
जनाब-ए-शैख़ को ये मश्क़ है याद-ए-इलाही की,
ख़बर होती नहीं दिल को ज़बाँ से याद करते हैं|
चकबस्त ब्रिज नारायण
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