क़ैद से आज़ाद करते हैं

नया मस्लक नया रंग-ए-सुख़न ईजाद करते हैं,

उरूस-ए-शेर को हम क़ैद से आज़ाद करते हैं|

चकबस्त ब्रिज नारायण

Leave a comment