बच्चा!

अज्ञेय जी द्वारा संपादित सप्तकों के कवियों की कविताएं शेयर करने के क्रम में आज से मैं चौथा सप्तक के कवियों की रचनाएं शेयर कर रहा हूँ और इस क्रम में आज मैं स्वर्गीय अवधेश कुमार जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ|

इनकी शायद एक ही रचना मैंने पहले शेयर की है|

लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय अवधेश कुमार जी की यह कविता –

बच्चा अपने आपसे कम से कम क्या मांग सकता है ?

एक चांद
एक शेर
किसी परीकथा में अपनी हिस्सेदारी
या आपका जूता !

आप उसे ज़्यादा से ज़्यादा क्या दे सकते हैं ?

आप उसे दे सकते हैं केवल एक चीज़ –
अपना जूता : बाक़ी तीन
चीज़ें आप क़िताब के हवाले कर देते हैं ।

कि फिर वह बच्चा ज़िन्दगी भर सोचता रह जाता है
कि अपना पैर किस में डाले
उस क़िताब में या आपके जूते में !

(आभार- एक बात मैं और बताना चाहूँगा कि अपनी ब्लॉग पोस्ट्स में मैं जो कविताएं, ग़ज़लें, शेर आदि शेयर करता हूँ उनको मैं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध ‘कविता कोश’ अथवा ‘Rekhta’ से लेता हूँ|)

आज के लिए इतना ही,

नमस्कार| 

                            ********

2 responses to “बच्चा!”

  1. नमस्कार 🙏🏻

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    1. नमस्कार जी

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