रिश्तों की पैमाइश पर!

फ़ासले हैं भी और नहीं भी नापा तौला कुछ भी नहीं,

लोग ब-ज़िद रहते हैं फिर भी रिश्तों की पैमाइश पर|

गुलज़ार

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