काग़ज़ का इक चाँद!

काग़ज़ का इक चाँद लगा कर रात अँधेरी खिड़की पर,

दिल में कितने ख़ुश थे अपनी फ़ुर्क़त की आराइश पर|

गुलज़ार

Leave a comment