मैं अपना अज़्म* लेकर मंज़िलों की सम्त निकला था,
मशक़्क़त हाथ पे रक्खी थी क़िस्मत घर पे रक्खी थी|
*संकल्प
राहत इंदौरी
A sky full of cotton beads like clouds
मैं अपना अज़्म* लेकर मंज़िलों की सम्त निकला था,
मशक़्क़त हाथ पे रक्खी थी क़िस्मत घर पे रक्खी थी|
*संकल्प
राहत इंदौरी
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