A sky full of cotton beads like clouds
झूम के फिर चलीं हवाएँ वज्द में आईं फिर फ़ज़ाएँ,
फिर तिरी याद की घटाएँ सीनों पे छा के रह गईं|
फ़िराक़ गोरखपुरी
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