सीनों पे छा के रह गईं!

झूम के फिर चलीं हवाएँ वज्द में आईं फिर फ़ज़ाएँ,

फिर तिरी याद की घटाएँ सीनों पे छा के रह गईं|

फ़िराक़ गोरखपुरी

One response to “सीनों पे छा के रह गईं!”

  1. christinenovalarue avatar
    christinenovalarue

    💜

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