A sky full of cotton beads like clouds
फिर हैं वही उदासियाँ फिर वही सूनी काएनात,
अहल-ए-तरब* की महफ़िलें रंग जमा के रह गईं|
*मज़ा करने वालों
फ़िराक़ गोरखपुरी
Δ
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