नर्म फ़ज़ा की करवटें!

नर्म फ़ज़ा की करवटें दिल को दुखा के रह गईं,

ठंडी हवाएँ भी तिरी याद दिला के रह गईं|

फ़िराक़ गोरखपुरी

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