A sky full of cotton beads like clouds
तेरे ख़िराम-ए-नाज़* से आज वहाँ चमन खिले,
फ़सलें बहार की जहाँ ख़ाक उड़ा के रह गईं|
*मतवाली चाल
फ़िराक़ गोरखपुरी
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