हमारे बा‘द अब महफ़िल में अफ़्साने बयाँ होंगे,
बहारें हम को ढूँढेगी न जाने हम कहाँ होंगे|
मजरूह सुल्तानपुरी
A sky full of cotton beads like clouds
हमारे बा‘द अब महफ़िल में अफ़्साने बयाँ होंगे,
बहारें हम को ढूँढेगी न जाने हम कहाँ होंगे|
मजरूह सुल्तानपुरी
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