अंदर कि बाहर देखिए!

ज़ेहन-ए-इंसानी इधर ‘आफ़ाक़ की वुसअत’* उधर,

एक मंज़र है यहाँ अंदर कि बाहर देखिए|

*दुनिया का फैलाव

जावेद अख़्तर

Leave a comment