दिल पे जो बीते सह लेते हैं अपनी ज़बाँ में कह लेते हैं,
‘इंशा’-जी हम लोग कहाँ और ‘मीर’ का रंग-ए-कलाम कहाँ|
इब्न-ए-इंशा
A sky full of cotton beads like clouds
दिल पे जो बीते सह लेते हैं अपनी ज़बाँ में कह लेते हैं,
‘इंशा’-जी हम लोग कहाँ और ‘मीर’ का रंग-ए-कलाम कहाँ|
इब्न-ए-इंशा
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