पलभर चमके डूब गए

साँझ-समय कुछ तारे निकले पल-भर चमके डूब गए,

अम्बर अम्बर ढूँढ रहा है अब उन्हें माह-ए-तमाम कहाँ|

इब्न-ए-इंशा

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