दर्द शदीद हुआ!

आन के इस बीमार को देखे तुझको भी तौफ़ीक़* हुई,

लब पर उसके नाम था तेरा जब भी दर्द शदीद** हुआ|

*हिम्मत , **तेज

इब्न-ए-इंशा

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