ज़ख़्म न जाने मेरे!

चारा-गर* यूँ तो बहुत हैं मगर ऐ जान-ए-‘फ़राज़’,

जुज़ तिरे** और कोई ज़ख़्म न जाने मेरे|    

*Doctors, *ExceptYou

अहमद फ़राज़

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