सुनाते हैं फ़साने मेरे!

ख़ल्क़* की बे-ख़बरी है कि मिरी रुस्वाई,

लोग मुझको ही सुनाते हैं फ़साने मेरे|

*दुनिया

अहमद फ़राज़

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