ये भी ख़ज़ाने मेरे!

लुट के भी ख़ुश हूँ कि अश्कों से भरा है दामन,

देख ग़ारत-गर-ए-दिल* ये भी ख़ज़ाने मेरे|

*लुटे हुए दिल

अहमद फ़राज़

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