लहू अपनी गर्दन पे!

क़त्ल-ए-दिल-ओ-जाँ अपने सर है अपना लहू अपनी गर्दन पे,

मोहर-ब-लब बैठे हैं किसका शिकवा किसके साथ करें|

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

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