दर्द थमे तो बात करें!

अब जो कोई पूछे भी तो उससे क्या शरह-ए-हालात करें,

दिल ठहरे तो दर्द सुनाएँ दर्द थमे तो बात करें|

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

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