पिछली दो बार की तरह एक बार फिर लंदन प्रवास का अंत होने को है, यहाँ रहते हुए अंतिम सप्ताहांत भी निकल गया, इस रविवार को एक बार फिर से हम भारतीयों के प्रिय स्थान साउथ हॉल गए, वहाँ कुछ खरीदारी की और मनपसंद खाना खाया|

गोवा लौटने के बाद यहाँ का प्रवास फिर से काफी समय तक याद आएगा| बचपन से जवान होने तक दिल्ली में यमुना पार शाहदरा में रहा, उस समय जब यमुना नदी पर एक ही पुल था और यमुना पार करके मुख्य दिल्ली में आना एक बड़ा काम होता था| दिल्ली के बाद जयपुर के अलावा, बहुत सी प्रोजेक्ट साइट्स पर रहा और एक वर्ष से अधिक समय तक मुंबई और रिटायरमेंट के बाद 6 वर्ष तक गुड़गांव में भी रहा|

सेवा के दौरान एक कवि ने हाथ देखकर कहा था कि आप विदेश अवश्य जाओगे, रिटायरमेंट हुआ तो यही खयाल आया कि अब कहाँ से विदेश जाऊंगा! लेकिन जो काम सेवा के दौरान नहीं हो पाया वह रिटायरमेंट के बाद हुआ, और खूब हुआ| एक बेटा दुबई में रहता है और एक बेटा कुछ समय तंजानिया के ‘दार एस्सलाम’ में था, सो एक माह के दौरान दोनों स्थानों में 15-15 दिन का प्रवास किया और बाद में जब बड़ा बेटा-बहू लंदन आ गए तब से तीन बार लंदन आने का मौका मिला है, हर बार एक माह या इससे कुछ अधिक समय का प्रवास रहा है| भाषा और संस्कृति का अंतर है अन्यथा कह सकते हैं कि मैं अब लंदन को उतना तो जानता ही हूँ, जितना भारत के कुछ नगरों को जानता हूँ|

आज वास्तव में पूरी दुनिया एक छोटा सा गाँव बन गई है| मोदी जी दुनिया के जिस कोने में जाते हैं उनको देखने-सुनने वाले भारतीय मूल के लोगों की भीड़ लग जाती है| मुझे डॉक्टर कुमार विश्वास की वह कविता भी याद आती है-
हम हैं देसी हाँ मगर हर मुल्क में छाए हैं हम
एक ज़माना था जब कुछ भारतीय मजदूरी करने के लिए विदेशों में जाते थे, एग्रीमेंट के अंतर्गत, जिन्हे ‘गिरमिटिया मजदूर’ कहा जाता था| उन लोगों ने अपने परिश्रम के बल पर वहाँ समृद्धि हासिल की और कहीं तो वे राष्ट्राध्यक्ष तक बन गए|

वह बहुत पुरानी बात थी, आज अपनी प्रतिभा के बल पर हमारे युवा, दुनिया के सभी देशों में जा रहे हैं और हर क्षेत्र में नई ऊँचाइयाँ हासिल कर रहे हैं| इस विषय पर बात करूंगा तो बहुत लंबी चल जाएगी, अभी इतना ही कहना चाहूँगा, बल्कि दोहराना चाहूँगा कि जैसे दिल्ली में रहते हुए कभी मैंने यह कल्पना नहीं की थी कि मैं समुद्र के बिल्कुल पास रहूँगा, गोवा जाने पर वैसा हो गया!

लंदन में तो ऐसा लगता है कि आधा लंदन नदी अथवा उससे जुड़ी नहरों के किनारे बसा है| मेरे बेटे का घर, जहां से अब वापस जाना है वह भी कैनरी व्हार्फ में नहर के किनारे है, आस पास ही तीन रेल सेवाएं उपलब्ध हैं, सामने पुल पार करके किसी भी स्टेशन जा सकते हैं| सिटी बैंक सहित विश्व प्रसिद्ध बैंकों के मुख्य भवन आस पास ही हैं| ऐसा सुंदर लोकेशन घर के लिए बहुत मुश्किल से मिलता है, हाँ एक ‘ऑन ग्राउंड’ रेल सेवा की कुछ आवाजें रात में आती हैं|
आज के लिए इतना ही,
नमस्कार|
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