झोंका बहाना हो गया है

हमें तो ख़ैर बिखरना ही था कभी न कभी,

हवा-ए-ताज़ा का झोंका बहाना हो गया है|

इरफ़ान सिद्दीक़ी

2 responses to “झोंका बहाना हो गया है”

  1. With all due respect to इरफ़ान सिद्दीक़ी Sir: (This is just for fun)

    हमें तो ख़ैर बिखरना ही था कभी न कभी,
    हवा-ए-ताज़ा का झोंका बहाना हो गया है|
    काश ये झोंके ज़रासा और ठहर कर आते
    एक शाम और उनके लबों का स्पर्श पाते |

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