A sky full of cotton beads like clouds
हमें तो ख़ैर बिखरना ही था कभी न कभी,
हवा-ए-ताज़ा का झोंका बहाना हो गया है|
इरफ़ान सिद्दीक़ी
With all due respect to इरफ़ान सिद्दीक़ी Sir: (This is just for fun)
हमें तो ख़ैर बिखरना ही था कभी न कभी, हवा-ए-ताज़ा का झोंका बहाना हो गया है| काश ये झोंके ज़रासा और ठहर कर आते एक शाम और उनके लबों का स्पर्श पाते |
LikeLiked by 1 person
Good
Δ
Leave a comment