तल्ख़ियाँ भी लाज़मी हैं!

तल्ख़ियाँ भी लाज़मी हैं ज़िंदगी के वास्ते,

इतना मीठा बन के मत रहिए शकर हो जाएगी|

राहत इंदौरी

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