मैडम तुसाद म्यूजियम!

लंदन प्रवास के दौरान इस शनिवार को हमने मैडम तुसाद को उपकृत किया| यहाँ पर जब नरेंद्र मोदी जी से लेकर शाहरुख खान, सचिन तेंदुलकर, ऐश्वर्य राय, कटरीना कैफ़ आदि-आदि भारतीय हस्तियाँ और विंस्टन चर्चिल, बराक ओबामा आदि अनेक विदेशी राजनेता, कलाकार, खिलाड़ी आ चुके हैं अथवा उनकी मोम की बनी मूर्तियाँ यहाँ मौजूद हैं तो हमने सोचा कि हम भी हो आते हैं| इतना समय तो हमारे पास था नहीं कि हम अपनी मूर्ति भी बनवा लेते, वैसे मुझे पब्लिसिटी ज्यादा पसंद भी नहीं है|

लंदन में जो दर्शनीय स्थान हैं उनमें आज की तारीख में निश्चित रूप से मैडम तुसाद म्यूजियम भी शामिल है| हाँ तो बेटे ने अग्रिम रूप से दोपहर 12-15 पर प्रवेश के लिए टिकट कराया हुआ था, घर से हम जुबिली लाइन द्वारा चलकर बेकर स्ट्रीट स्टेशन तक पहुंचे और उस स्टेशन से कुछ दूर पर ही मैडम तुसाद म्यूजियम स्थित है| और हाँ इस स्टेशन से बाहर निकलते ही जासूसी कैरेक्टर ‘शरलॉक होम्स’ की सिगार पीट हुए एक मूर्ति लगी है, जिसके निकट खड़े होकर काफी लोग अपनी फ़ोटो खिंचवाते हैं|

हाँ तो मैडम तुसाद म्यूजियम देखना वास्तव में अलग तरह का अनुभव है, विश्व में सिनेमा, कला, राजनीति, संगीत और खेल आदि अनेक क्षेत्रों में अपना नाम करने वाले अनेक लोगों की मूर्तियाँ यहाँ आपको देखने को मिल जाएंगी, यद्यपि बहुत से नहीं भी मिलेंगे, जैसे मुझे राज कपूर का यहाँ न होना अखरा| खैर हर जगह हर कोई तो नहीं हो सकता| मैंने और मेरे परिजनों ने भी अनेक विशिष्ट व्यक्तियों के मूर्ति रूप के साथ कुछ फ़ोटो खिंचवाईं|

हाँ म्यूजियम में एक अंधियारा खंड अपराध जगत को भी समर्पित था, जिसमें जेल की कोठरियाँ, फांसी दिए जाने आदि की घटनाएं आदि भी दिखाई गई थीं|

इस भ्रमण का एक सुंदर भाग एक ‘हीरोज’ को लेकर एक फोर-डी फिल्म का प्रदर्शन भी था जिसमें युद्ध की घटनाओं, जानवरों आदि की प्रस्तुति ऐसी वास्तविक लगती थी कि जैसे कोई परदे से उछलकर हमारे ऊपर ही आ रहा हो, पानी के छींटे आना और गोली चलने पर सीट के पीछे झटका लगना आदि इस अनुभव को और वास्तविक बना देते थे|

इसके बाद ‘स्पिरिट ऑफ लंदन’ नामक एक टैक्सी-ट्रेन में यात्रा के दौरान भी हमने अनेक प्राचीन दृष्य, कैरेक्टर आदि देखे जो अपने आपमें एक दिव्य अनुभव था| कुल मिलाकर मैडम तुसाद म्यूजियम का यह लगभग पौने दो घंटे तक चला यह भ्रमण एक यादगार अनुभव था|

मैडम तुसाद म्यूजियम भ्रमण के बाद हमने ‘टेस्ट ऑफ पंजाब’ नामक एक रेस्टोरेंट में दोपहर का भोजन किया, जिसको एक पाकिस्तानी द्वारा चलाया जाता है और लंदन में आने के बाद भारत और पाकिस्तान एक ही हो जाते हैं, वैसे इनको अलग भी तो यहाँ वालों ने ही किया था|

इसके बाद हम एक पटरी पर लगने वाले बाजार “नॉटिंग हिल गेट मार्केट’ में गए, जिसको शायद कुछ समय पहले पत्रकार रवीश कुमार ने भी कवर किया था, इस विशेषता के लिए कि किस प्रकार यहाँ हर स्टाल लगाने वाले का स्थान निश्चित है, उनको बिजली का कनेक्शन भी उपलब्ध है और उनका वहाँ होना विधिसंगत है और किसी प्रकार के विवाद की गुंजाइश नहीं है|

हाँ यह भी उल्लेख करना चाहूँगा कि इससे पहले शुक्रवार की शाम को हमने ‘वूलविच’ क्षेत्र में ‘कैलाश मोमोज’ नामक एक नेपाली रेस्टोरेंट में रात्रि भोजन का आनंद लिया था, जिनकी कुछ विशेष किस्म की नेपाली डिश तैयार करने की अपनी विशेषज्ञता है, यह अनुभव भी बिल्कुल अलग तरह का था|

इस प्रकार लंदन यात्रा में पूरा दिन बिताकर हम वापस घर लौट आए जैसे हर कोई लौटता है, वह बुद्धू हो या बुद्धिमान|        

 आज के लिए इतना ही,

नमस्कार|

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