जैसा मैंने पहले बताया है इस समय हम लंदन के अपने तीसरे प्रवास पर हैं, बेटे के घर पर| इस सप्ताहांत में एक बार फिर हम बाहर घूमने गए, यह यात्रा लंदन से बाहर की थी| सामान्यतः हम भारत में गोवा के पंजिम नगर में रहते हैं, समुद्र के किनारे और इस सप्ताहांत में हम ब्रिटेन के एक समुद्र तट पर बसे नगर पेंजेन्स की यात्रा पर गए|

पेंजेन्स, ब्रिटेन में कॉर्नवाल के पेनविद जिले में स्थित प्राचीन नगर और बंदरगाह है| यहाँ अगर आप समय लेकर जाते हैं तो प्रकृति की सुंदरता का भरपूर आनंद ले सकते हैं और अनेक दर्शनीय स्थान देख सकते हैं| समुद्र तट पर तो आप जी भरकर दृश्यों का आनंद ले ही सकते हैं, हॉप-ऑन, हॉप-ऑफ बस से यदि आप भ्रमण करना चाहते हैं तो बेहतर होगा कि आप सुबह जल्दी निकलें और भरपूर ऊर्जा के साथ निकलें, क्योंकि कुछ ऊंचाई वाले स्थानों पर जाने में मुझ जैसे बूढ़े लोगों की तो हिम्मत जवाब दे जाती है|

खैर मैं बताना चाहूँगा कि हमने लंदन में, एलिजाबेथ लाइन के कैनारी व्हार्फ स्टेशन से अपनी यात्रा प्रारंभ की और इस लाइन से पेडिंगटन स्टेशन तक गए और वहाँ से ग्रेट वेस्टर्न रेलवे की ट्रेन पकड़कर 5 घंटे की यात्रा करके पेंजेन्स स्टेशन पहुंचे| ब्रिटेन में भी भारत की तरह वेस्टर्न, नॉर्दर्न आदि लाइनें हैं लेकिन उन सबके पहले ‘ग्रेट’ जुड़ा हुआ है|

हम घर से सुबह 9 बजे के आस पास निकले थे, पेंजेन्स 3-4 बजे के बीच पहुँचने के बाद स्टेशन के बगल में हमें अपने होटल ‘प्रीमियर इन’ पहुँचने के लिए सिर्फ सड़क पार करनी थी| उस रोज शाम को होटल के सामने ही समुद्र तट पर काफी दूर तक टहले, कुछ स्वादिष्ट पकौड़े खाए ऐसा लगा कि भारत में ही खा रहे हैं और खूबसूरत जुबिली पूल, जिसमें बहुत से लोग तैर रहे थे, हमने उसको बाहर से ही देखकर आनंद लिया|

अगले दिन सुबह हम ‘हिप ऑन-हिप ऑफ’ बस द्वारा नगर भ्रमण पर निकले, पहला पड़ाव एक पुराना ‘मार्केट टाउन’ था जहां पानी के बीच में टापू पर ‘सेंट माइकेल्स माउंट’है, इस माउंट पर जाने के लिए सुबह नाव द्वारा जाना पड़ता है, टापू तक फुटपाथ बनी है जो उस समय आधे से अधिक पानी में डूबी रहती है लेकिन दोपहर बाद अक्सर पानी उतर जाता है और आप फुटपाथ पर चलकर वापस आ सकते हैं|
इसके बाद हम ‘मीनाक थिएटर’ देखने गए, जिसे किसी दंपति ने समुद्र किनारे की पहाड़ियों को काटकर बहुत सुंदर तरीके से तैयार कराया था, इसका उद्देश्य था कि यहाँ शेक्सपीयर के लिखे नाटकों की प्रस्तुति की जाए| हम वहाँ अपनी बुकिंग के हिसाब से शाम को 3 बजे पहुंचे, उस दिन नाटक तो नहीं होना था लेकिन किसी नाटक की रिहर्सल चल रही थी, बहुत सारे कलाकार इसमें शामिल थे और हमें यह प्रस्तुति बहुत सुंदर लगी| हाँ चढ़ाई पर से होकर इस थिएटर तक पहुंचना और फिर अंदर जाने के बाद सीढ़ियों से उतरना और बाद में वापस चढ़ना वास्तव में एक बड़ा काम था|

थिएटर में से और वहाँ चढ़ाई से होकर जाते हुए भी ‘पॉर्थचैपल बीच’ की बहुत सुंदर छवियाँ देखने को मिलती हैं, बाद में फिर नीचे उतरकर बीच पर जाने की तो हमारी हिम्मत नहीं थी, इसलिए हम थिएटर में नाटक की प्रस्तुति देखकर ही बस स्टेशन पर वापस आ गए|
वैसे तो बाकी टूरिस्ट स्टेशनों की तरह पेंजेन्स में भी देखने के लिए और बहुत से विकल्प हैं लेकिन चढ़ाई पर जाने के बाद हमारी और हिम्मत नहीं थी, इसलिए हम वापस होटल आ गए|

अगले दिन दोपहर बाद हमें वापस लौटना था, इसलिए हम आराम से सोकर उठे, एक बार फिर से स्थानीय बाजार में घूमे, बढ़िया नाश्ता किया, एक बात और लंदन में तो हमने ऐसे बहुत से रेस्टोरेंट्स में खाना खाया ही है, जहां ऐसा लगता है कि हम भारत में ही हैं, पेंजेन्स में भी हमने एक ऐसे ‘लिटिल इंडिया’ रेस्टोरेंट में दो दिन डिनर किया जिसमें बहुत अच्छा भारतीय शाकाहारी भोजन भी मिलता है|
इस प्रकार अपने पेंजेन्स प्रवास का भरपूर आनंद लेते हुए हम रविवार को दोपहर 2 बजे के बाद वहाँ से रवाना हुए और शाम 8 बजे के आस पास वापस लंदन में अपने बेटे के घर पहुँच गए| इस यात्रा पर मैं, मेरी पत्नी, बेटा और बहू साथ थे, एक बात और जिस दिन हम गए उस दिन मेरी बहू का जन्म दिन भी था|
आज के लिए इतना ही,
नमस्कार
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