मिरा मेहमाँ होता है!

वो दर्द कि उसने छीन लिया वो दर्द कि उसकी बख़्शिश था,

तन्हाई की रातों में ‘इंशा’ अब भी मिरा मेहमाँ होता है|

इब्न-ए-इंशा

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