जो पिन्हाँ होता है!

हम तेरी सिखाई मंतिक़* से अपने को तो समझा लेते हैं,

इक ख़ार खटकता रहता है सीने में जो पिन्हाँ होता है|

*ज्ञान

इब्न-ए-इंशा

Leave a comment