दिल किसके तसव्वुर में जाने रातों को परेशाँ होता है,
ये हुस्न-ए-तलब की बात नहीं होता है मिरी जाँ होता है|
इब्न-ए-इंशा
A sky full of cotton beads like clouds
दिल किसके तसव्वुर में जाने रातों को परेशाँ होता है,
ये हुस्न-ए-तलब की बात नहीं होता है मिरी जाँ होता है|
इब्न-ए-इंशा
Leave a comment