ग़ाफ़िलों को क्या सुनाऊँ दास्तान-ए-इश्क़-ए-यार,
सुनने वाले मिलते हैं दर्द-आश्ना मिलता नहीं|
अकबर इलाहाबादी
A sky full of cotton beads like clouds
ग़ाफ़िलों को क्या सुनाऊँ दास्तान-ए-इश्क़-ए-यार,
सुनने वाले मिलते हैं दर्द-आश्ना मिलता नहीं|
अकबर इलाहाबादी
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