अपना पता मिलता नहीं

मा‘रिफ़त ख़ालिक़ की आलम में बहुत दुश्वार है,

शहर-ए-तन में जबकि ख़ुद अपना पता मिलता नहीं|

अकबर इलाहाबादी

Leave a comment