क्या ख़ुदाई रह गई!

ताक़-ए-अबरू में सनम के क्या ख़ुदाई रह गई,

अब तो पूजेंगे उसी काफ़िर के बुत-ख़ाने को हम|

नज़ीर अकबराबादी

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