वहीं इनकी बारगाहें!

तिरे ख़ानुमाँ-ख़राबों* का चमन कोई न सहरा,

ये जहाँ भी बैठ जाएँ वहीं इनकी बारगाहें|

*बर्बाद, मजरूह सुल्तानपुरी

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