तिरे ख़ानुमाँ-ख़राबों* का चमन कोई न सहरा,
ये जहाँ भी बैठ जाएँ वहीं इनकी बारगाहें|
*बर्बाद, मजरूह सुल्तानपुरी
A sky full of cotton beads like clouds
तिरे ख़ानुमाँ-ख़राबों* का चमन कोई न सहरा,
ये जहाँ भी बैठ जाएँ वहीं इनकी बारगाहें|
*बर्बाद, मजरूह सुल्तानपुरी
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